घुटने की सर्जरी के बीच कैप्टन को ED का नोटिस, क्या फिर बदलेंगे पंजाब के सियासी समीकरण?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह को FEMA केस में समन भेजा है। अस्पताल में भर्ती होने के कारण वे 12 फरवरी को पेश नहीं हो पाएंगे। पढ़ें पूरी खबर।

Feb 12, 2026 - 08:38
घुटने की सर्जरी के बीच कैप्टन को ED का नोटिस, क्या फिर बदलेंगे पंजाब के सियासी समीकरण?

जालंधर/चंडीगढ़ : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत दर्ज एक पुराने मामले में 12 फरवरी को पेश होने के लिए समन जारी किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह समन 3-4 दिन पूर्व जारी किया गया था और मामले में जांच जारी है।

हालांकि, निर्धारित तिथि पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ईडी के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे। वे वर्तमान में चंडीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती हैं और हाल ही में घुटने का ऑपरेशन (नी रिप्लेसमेंट सर्जरी) कराने के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। उनकी चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए फिलहाल पूछताछ के लिए यात्रा करना संभव नहीं बताया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक यह मामला एक पुराने प्रकरण से जुड़ा है, जिसका संबंध कथित तौर पर उनके पुत्र रणिंदर सिंह से जुड़े एक ट्रस्ट से बताया जा रहा है। ईडी ने FEMA के प्रावधानों के तहत समन जारी कर दस्तावेजी एवं अन्य संबंधित जानकारियां मांगी हैं। एजेंसी इस मामले में वित्तीय लेन-देन और विदेशी मुद्रा से जुड़े संभावित उल्लंघनों की जांच कर रही है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

इस घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीतिक फिजा को गरमा दिया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं, जबकि केंद्र में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समन का समय राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।

पिछले कुछ समय से अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह बीते एक महीने में फिर से सार्वजनिक रूप से सक्रिय नजर आए थे। उन्होंने कई मीडिया इंटरव्यू दिए, जिनमें अकाली दल–भाजपा गठबंधन की संभावनाओं और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली पर खुलकर अपने विचार रखे थे।

इसी दौरान 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले उनके कांग्रेस में संभावित वापसी को लेकर भी अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि इस संबंध में किसी भी राजनीतिक दल या स्वयं अमरिंदर सिंह की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी इन चर्चाओं ने राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को गति दी थी।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

ईडी की ओर से जारी समन के बाद अब सभी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर मामले की आगामी कानूनी प्रक्रिया पर टिकी है। यदि स्वास्थ्य कारणों से उपस्थिति संभव नहीं होती है, तो एजेंसी आगे की तारीख निर्धारित कर सकती है या वैकल्पिक माध्यम से पूछताछ की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि FEMA से जुड़े मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और जांच की प्रक्रिया अक्सर लंबी चलती है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि यह मामला आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।

राज्य की राजनीति पहले ही संभावित गठबंधनों और चुनावी समीकरणों को लेकर सक्रिय है। ऐसे में ईडी का यह समन राजनीतिक और कानूनी—दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।