अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर दिए अपने पुराने फैसले को पलटते हुए नया निर्णय सुनाया है। साल 1967 में 'अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने AMU को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से इनकार कर दिया था। अब, सात जजों की संवैधानिक पीठ ने 4-3 के बहुमत से इस पुराने फैसले को खारिज कर दिया है।

Nov 9, 2024 - 06:53
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर दिए अपने पुराने फैसले को पलटते हुए नया निर्णय सुनाया है। साल 1967 में 'अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट ने AMU को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से इनकार कर दिया था। अब, सात जजों की संवैधानिक पीठ ने 4-3 के बहुमत से इस पुराने फैसले को खारिज कर दिया है।

क्या है मामला?

साल 2006 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना था। उच्च न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने इस मामले को सात जजों की बड़ी पीठ के पास भेज दिया। इसके बाद, संवैधानिक पीठ ने फरवरी 2024 में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट का नया रुख

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अगर कोई संस्थान कानून के तहत बना है, तो वह अल्पसंख्यक संस्थान होने का दावा कर सकता है। इस फैसले ने 1967 के पुराने फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि कानून द्वारा स्थापित कोई भी संस्थान अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त नहीं कर सकता।

अगला कदम क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अब नियमित पीठ के पास भेज दिया है, जो यह तय करेगी कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रहेगा या नहीं। इसका मतलब है कि अब AMU का भविष्य एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है, और इसका अंतिम निर्णय नियमित पीठ ही करेगी।

फैसले का असर

इस फैसले का सीधा असर अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर भी पड़ सकता है, जो अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त करना चाहते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कैसे आगे बढ़ता है और इसका देश की शिक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे देश के शिक्षा तंत्र और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए एक नजीर भी साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें नियमित पीठ के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि AMU को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिलेगा या नहीं।

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